दुनिया में ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि विश्व महामारी क्या होती है इसका कब और क्यों एलान किया जाता है और जब इसका एलान किया जाता है तो इसका क्या मतलब होता है?
बहुत सारे लोग यह भी नहीं जानते कि क्या विश्व महामारी का यह पहली बार एलान किया गया है या इससे पहले भी इस तरह के एलान हो चुके हैं।
इस लेख में इसी प्रकार के कुछ सवालों के जवाब दिए गए हैं और यह समझाने की कोशिश की गई है कि विश्व महामारी क्या होती है।
विश्व महामारी क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी भी बीमारी को विश्व महामारी घोषित करने की कोई निश्चित कार्यशैली नहीं है लेकिन किसी भी बीमारी को उस समय विश्व महामारी घोषित किया जाता है जब बीमारी एक से दूसरे देश सफ़र करके बहुत सारे और हर उम्र के लोगों को प्रभावित करने लगे।
किसी भी बीमारी को विश्व महामारी घोषित करने से पहले आरंभिक तौर पर ख़तरनाक और महामारी घोषित किया जाता है लेकिन यह भी संभव है कि किसी बीमारी या वायरस को डायरेक्ट विश्व महामारी घोषित कर दिया जाए।
डब्ल्यूएचओ की ओर से नए कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित किए जाने से पहले 2010 में स्वाइन फ़्लू को विश्व महामारी घोषित किया गया था।
इस बार डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को उस समय विश्व महामारी घोषित किया जब वह दुनिया के 114 से अधिक देशों में फैला और इससे लगभग सवा एक लाख लोग प्रभावित हुए और यह वायरस तेज़ी से एक से दूसरे देश और फिर वापस उसी देश में फैलने लगा जहां से वह शुरू हुआ था।
महामारी और अंतर्राष्ट्रीय महामारी में क्या अंतर है?
नए कोरोना वायरस के शुरु होने से ही अंग्रेज़ी का शब्द एपीडेमिक प्रयोग किया जाने लगा जिसे महामारी कहा जाता है। महामारी उस बीमारी को कहा जाता है जो एक से दूसरे व्यक्ति में तेज़ी से फैलती है।
वैसे तो महामारी को ही अंतर्राष्ट्रीय महामारी कहा जाता है लेकिन किसी भी महामारी को उस समय अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित किया जाता है जब वह तेज़ी से दुनिया के हर इलाक़े में और लगभग हर उम्र के लोगों को प्रभावित करे। लेकिन अगर कोई भी महामारी हर उम्र के लोगों को प्रभावित न भी करे तो उसे डब्ल्यूएचओ विभिन्न चीज़ों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय महामारी या पैनडेमिक घोषित कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना को महामारी इसी आधार पर घोषित किया है।
किसी भी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय महामारी कहने का फ़ैसला कैसे किया जाता है?
डब्ल्यूएचओ की ओर से किसी भी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय महामारी तब घोषित किया जाता है जब कोई बीमारी तेज़ी से एक से दूसरे देश या इंसान में फैलने के साथ ही समाज के दूसरे प्राणियों जैसे जानवरों और पौदों को भी प्रभावित करती है।
कभी कभी जानवरों और पौधों से शुरू होने वाली बीमारी या वायरस को भी अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित किया जा सकता है क्योंकि यह बीमारी बड़े पैमाने पर इंसानों को भी प्रभावित करती है।
अगर किसी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित कर दिया जाए तो दुनिया के सभी देशों, आम लोगों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की नैतिक ज़िम्मेदारी हो जाती है कि वह महामारी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने से रोकने में अपनी भूमिका निभाएं।
किसी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित करने का अधिकार किस के पास है?
डब्ल्यूएचओ के ही पास यह अधिकार है कि वह किसी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित करे। डब्ल्यूएचओ दरअस्ल संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध लेकिन स्वाधीन संस्था है। इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गई थी और इस समय यह संस्था दुनिया के 150 देशों में काम कर रही है।
कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित किए जाने से क्या होगा?
हालांकि कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय महामारी घोषित कर दिए जाने से इसके फैलाव या ख़तरे में वृद्धि या कमी नहीं होगी लेकिन इस घोषणा के बाद दुनिया के देश इससे निपटने के लिए एकजुट हो जाएंगे। दुनिया के देश अपने यहां इस बीमारी की रोकथाम के लिए कड़े क़दम उठाने के साथ ही अन्य देशों और सरकारों से भरपूर सहयोग करेंगे।
(डान डाट काम में छपे लेख का सारांश)